ऐसी भी बातें होती हैं Chapter 4 Summary Class 9 Ganga Hindi

NCERT Class 9 Aisi bhi Baatein Hoti hain Chapter 4 Summary से विद्यार्थियों को chapter revise करने में help मिलेगी और वे key points को भी समझ पाएँगें

यतींद्र मिश्र

यतींद्र मिश्र का जन्म 1977 में अयोध्या, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। उन्हें कविता, संगीत, ललित कलाओं, समाज और संस्कृति में विशेष रुचि है। उन्होंने शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर भी पुस्तक लिखी।

उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में यदा-कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप आदि हैं।

Aisi Bhi Baatein Hoti Hain Class 9 Summary Hindi 4

ऐसी भी बातें होती हैं यतींद्र मिश्र द्वारा लता मंगेशकर से लिया गया साक्षात्कार है। इसमें लता जी के बचपन, परिवार, संघर्ष, संगीत-साधना, त्योहारों, पुराने संगीत और जीवन-दृष्टि से जुड़ी बातें सामने आती हैं। साक्षात्कार के माध्यम से उनके व्यक्तित्व के उन पहलुओं को जाना जाता है जो सामान्यतः लोगों के सामने नहीं आते।

पिता का प्रभाव

लता जी के पिता पं. दीनानाथ मंगेशकर महान संगीत-प्रेमी और अनुशासनप्रिय व्यक्ति थे। उन्होंने लता जी को बचपन से संगीत की शिक्षा दी। उनकी ड्रामा कंपनी में संगीत और रागदारी का विशेष महत्व था। पिता को संगीत में पूरी तरह डूबा देखकर लता जी ने भी संगीत के प्रति गहरा लगाव विकसित किया।

पिता से मिले संस्कार

पिता ने लता जी को संगीत के साथ स्वाभिमान से जीने की शिक्षा दी। उन्होंने सिखाया कि यदि कोई बात सही लगे तो उसके लिए दृढ़ता से खड़ा रहना चाहिए और किसी के सामने अनावश्यक रूप से नहीं झुकना चाहिए। कठिन परिस्थितियों में भी आत्मसम्मान बनाए रखने की यही सीख उनके जीवन में बहुत उपयोगी रही।

बचपन की स्मृतियाँ

लता जी अपने भाई-बहनों के साथ फिल्मों के दृश्यों की नकल किया करती थीं। उन्हें ‘संत तुकाराम’ फिल्म की नकल करने की घटना विशेष रूप से याद है। उनके पिता धार्मिक और देशभक्ति की फिल्में ही देखने देते थे इसलिए बच्चों के ये फिल्मी खेल उनकी अनुपस्थिति में होते थे।

अभिनय से दूरी

लता जी ने बचपन में कुछ फिल्मों में अभिनय किया था लेकिन उन्हें मेकअप, कैमरे के सामने खड़े होना और अभिनय करना पसंद नहीं था। इसलिए उन्होंने अभिनय छोड़ दिया और अपना पूरा ध्यान गायन पर लगाया। छत्रपति शिवाजी के प्रति विशेष लगाव के कारण उन्होंने उसमें कुछ पंक्तियाँ अवश्य गाईं।

संघर्ष और परिवार की जिम्मेदारी

लता जी के संघर्ष के दिनों में रिकॉर्डिंग का काम सुबह से रात तक चलता था। वे एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो जाती रहती थीं। उनका सबसे बड़ा उद्देश्य अपने परिवार का पालन-पोषण करना था। वे अपनी परेशानियों की चिंता करने के बजाय अधिक से अधिक काम करके परिवार की जरूरतें पूरी करने पर ध्यान देती थीं।

बचपन का मेडल पाने का सपना

बचपन में लता जी अपने पिता और कुमार गंधर्व को मेडल पहने देखकर बहुत प्रभावित होती थीं। उनके मन में भी इच्छा थी कि बड़ी होकर उन्हें ऐसे ही मेडल मिलें। आगे चलकर उनकी संगीत-साधना और उपलब्धियों के कारण उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हुए।

पुराने संगीत और रिकॉर्डिंग तकनीक

लता जी ने पुराने समय की रिकॉर्डिंग की कठिनाइयों को याद किया। उस समय आधुनिक तकनीकी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं, फिर भी संगीतकार अपनी कल्पनाशीलता और प्रयोगों से गीतों में विशेष प्रभाव पैदा करते थे। ‘आएगा आने वाला’ की रिकॉर्डिंग इसका उदाहरण है।

त्योहारों की पारिवारिक परंपराएँ

लता जी ने अपने परिवार में मनाए जाने वाले होली, गुड़ी पड़वा, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों की यादें साझा कीं। उनके घर में त्योहार केवल मनोरंजन के अवसर नहीं थे बल्कि उनसे जुड़ी धार्मिक और पारिवारिक परंपराएँ भी निभाई जाती थीं।

दीपावली और संगीतकारों के प्रति सम्मान

फिल्म जगत में आने के बाद लता जी दीपावली पर अपने वरिष्ठ संगीतकारों के घर मिठाई लेकर जाती थीं। नौशाद साहब के घर सुबह बहुत जल्दी पहुँचने का प्रसंग विशेष रूप से रोचक है। इससे उनके सम्मान, विनम्रता और कृतज्ञता का भाव दिखाई देता है।

मंगला गौर की परंपरा

महाराष्ट्र में विवाह के बाद नई बहू के घर मंगला गौर का आयोजन होता था। इसमें आसपास की महिलाएँ एकत्र होकर गीत गातीं, नृत्य करतीं और लोक-मनोरंजन करती थीं। लता जी के बचपन में यह परंपरा काफी प्रचलित थी लेकिन धीरे-धीरे इसके समाप्त होने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की।

कोरस की लड़कियों से आत्मीय संबंध

पुराने समय में कोरस में गाने वाली लड़कियाँ विभिन्न संगीतकारों के साथ काम करती थीं। लता जी के उनके साथ बहुत आत्मीय संबंध थे और वे उन्हें अपने परिवार जैसा मानती थीं। पुराने दौर में कोरस की आवाजें मुख्य गायक के साथ ही रिकॉर्ड की जाती थीं जबकि बाद में रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया बदल गई।

संगीत की असीम शक्ति

लता जी का मानना था कि संगीत में असीम शक्ति होती है। तानसेन के दीपक और मेघ राग से जुड़ी कथाओं को वे निश्चित सत्य नहीं मानतीं लेकिन संगीत की असाधारण शक्ति पर उनका विश्वास था। वे मानती थीं कि सच्चा और गहरा संगीत कई अप्रत्याशित प्रभाव उत्पन्न कर सकता है।

अली अकबर ख़ाँ का प्रसंग

लता जी ने उस्ताद अली अकबर ख़ाँ का सरोद वादन सुना था। अत्यंत भावपूर्ण वादन के दौरान उनके सरोद का एक तार टूट गया। जब लता जी ने इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि बहुत सुर में तार लगने पर वह टूट जाता है। इस घटना ने लता जी के मन में संगीत की अनंत शक्ति का विश्वास और गहरा किया।

अमरता और नाम

अंत में लता जी ने कहा कि शरीर अमर नहीं होता लेकिन गीत और नाम रह सकते हैं। उन्होंने मराठी कहावत का अर्थ बताते हुए कहा कि गाँव बह जाता है लेकिन नाम रह जाता है। उन्हें इस बात की विशेष खुशी थी कि वे अपने पिता का नाम आगे बढ़ा सकीं।

शब्दार्थ of Chapter 4 Ganga Hindi

शब्दअर्थ
अप्रतिमबेजोड़, अनुपम
आकंठपूरी तरह
समर्पितपूर्ण रूप से दिया हुआ
स्मरणयाद
रागदारीराग गाने की क्रिया/ढंग
रागविशिष्ट ताल-लययुक्त संगीत-रचना
स्वाभिमानआत्मसम्मान
बैकुंठस्वर्ग
अनुयायीपीछे चलने वाला
मार्फतमाध्यम से
सबबकारण
अलबत्तानिस्संदेह/अवश्य
सत्रपातकार्य का आरंभ
आमदआना/आय
पार्श्वगायकपर्दे के पीछे किसी अभिनेता/अभिनेत्री के लिए गाने वाला
परहेजबचना
वाकयाघटना
खैरियतकुशलता/भलाई
फागफागुन में गाया जाने वाला गीत
धमारफाग का एक प्रकार
सोहरबच्चे के जन्म पर गाया जाने वाला गीत
बधावाबधाई/मंगलाचार
मसलनउदाहरण के रूप में
अप्रत्याशितजिसकी आशा न हो
अतिरेकआवश्यकता से अधिक
वाजिबउचित

मुहावरे और उनके प्रयोग

मुहावराअर्थवाक्य में प्रयोग
हाथ पसारनाकिसी से सहायता या वस्तु माँगनालता जी ने कठिन परिस्थितियों में भी किसी के आगे हाथ नहीं पसारे।
हाथ में आनाप्राप्त होनाबहुत मेहनत के बाद उसे सफलता हाथ में आई।
हाथ का मैलबहुत तुच्छ या आसानी से मिलने वाली वस्तुउसके लिए पैसा हाथ का मैल है।
हाथ से हाथ मिलानासहयोग करनादेश की प्रगति के लिए सभी को हाथ से हाथ मिलाना चाहिए।
हाथ साफ करनाचोरी करनाचोर ने मौका पाकर दुकान में हाथ साफ कर दिया।
हाथ से निकल जानानियंत्रण से बाहर हो जानासमय एक बार हाथ से निकल जाए, तो वापस नहीं आता।
हाथ धो बैठनाकिसी वस्तु या अवसर से वंचित हो जानालापरवाही के कारण वह अपना अच्छा अवसर हाथ धो बैठा।

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