पानी रे पानी Chapter में लेखक जल-चक्र, जल संकट, भूजल संरक्षण तथा वर्षा जल संचयन के महत्व को सरल और रोचक ढंग से समझाते हैं। लेखक बताते हैं कि धरती एक विशाल ‘गुल्लक’ के समान है जिसमें वर्षा का जल तालाबों, झीलों और अन्य जल स्रोतों के माध्यम से संचित होकर भूजल भंडार को समृद्ध करता है।
Chapter हमें जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने, वर्षा जल का संरक्षण करने तथा प्राकृतिक जल स्रोतों की रक्षा करने की प्रेरणा देता है ताकि भविष्य में सभी के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध रह सके।
लेखक परिचय
अनुपम मिश्र भारत के प्रसिद्ध लेखक, संपादक, पर्यावरणविद् और जल संरक्षण के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने पारंपरिक जल स्रोतों, वर्षा जल संचयन तथा जल संरक्षण के महत्व को लोगों तक पहुँचाने के लिए जीवनभर कार्य किया। उनकी चर्चित पुस्तक ‘आज भी खरे हैं तालाब’ जल संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है।
इसके अलावा ‘साफ माथे का समाज’ भी उनकी प्रसिद्ध पुस्तक है। वे गांधी शांति प्रतिष्ठान से प्रकाशित पत्रिका ‘गांधी मार्ग’ के संस्थापक एवं संपादक भी रहे। पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन के क्षेत्र में उनके योगदान ने समाज को जल के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पानी रे पानी Chapter Summary Class 7
पानी रे पानी पाठ में लेखक जल के महत्व, जल संकट के कारणों और जल संरक्षण की आवश्यकता को सरल भाषा में समझाते हैं।
लेखक सबसे पहले जल-चक्र का वर्णन करते हैं। वे बताते हैं कि समुद्र का पानी भाप बनकर बादल बनता है, वर्षा के रूप में धरती पर गिरता है और नदियों के माध्यम से फिर समुद्र में मिल जाता है। लेकिन वास्तविक जीवन में पानी की स्थिति इससे अलग दिखाई देती है। आज कई स्थानों पर समय पर पानी नहीं मिलता, लोग पानी के लिए परेशान होते हैं और कभी-कभी आपस में झगड़ भी पड़ते हैं। कई लोग मोटर लगाकर दूसरों के हिस्से का पानी खींच लेते हैं, जिससे जल संकट और बढ़ जाता है। दूसरी ओर, बरसात के समय अधिक वर्षा होने से बाढ़ जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं।
लेखक बताते हैं कि अकाल और बाढ़ एक ही समस्या के दो रूप हैं। यदि वर्षा के जल का सही ढंग से संरक्षण किया जाए, तो दोनों समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।
इस बात को समझाने के लिए लेखक धरती की तुलना एक बड़ी गुल्लक से करते हैं। जिस प्रकार हम अपनी गुल्लक में पैसे जमा करते हैं, उसी प्रकार वर्षा का जल तालाबों, झीलों और अन्य जल स्रोतों के माध्यम से धरती के अंदर पहुँचकर भूजल भंडार को भरता है। यही भूजल पूरे वर्ष हमारी आवश्यकताओं को पूरा करता है।
लेखक दुख व्यक्त करते हैं कि लोगों ने लालच में आकर तालाबों और जल स्रोतों को भरकर उन पर मकान, बाजार और अन्य निर्माण कर दिए। परिणामस्वरूप गर्मियों में पानी की कमी और बरसात में जलभराव तथा बाढ़ जैसी समस्याएँ बढ़ गई हैं।
लेखक संदेश देते हैं कि हमें वर्षा जल का संरक्षण करना चाहिए, तालाबों, झीलों और नदियों की रक्षा करनी चाहिए तथा भूजल भंडार को सुरक्षित रखना चाहिए। तभी भविष्य में जल संकट से बचा जा सकेगा और सभी को पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा। यह पाठ हमें जल को अमूल्य प्राकृतिक संपदा मानकर उसके संरक्षण की प्रेरणा देता है।
कठिन शब्दों के अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जल-चक्र | प्रकृति में पानी के घूमने की प्रक्रिया |
| भाप | गर्म होकर पानी का वाष्प बन जाना |
| बेवक्त | असमय, निर्धारित समय के बिना |
| अकाल | वर्षा के अभाव से उत्पन्न सूखा |
| बाढ़ | अधिक वर्षा के कारण चारों ओर पानी भर जाना |
| भूजल | धरती के नीचे जमा पानी |
| भंडार | संग्रह, खजाना |
| समृद्ध | भरपूर, संपन्न |
| जलस्रोत | पानी प्राप्त होने का स्थान |
| वर्षा जल | बारिश का पानी |
| संचयन | एकत्र करना, जमा करना |
| संरक्षण | रक्षा करना, सुरक्षित रखना |
| विशाल | बहुत बड़ा |
| प्राकृतिक | प्रकृति से संबंधित |
| रिसकर | धीरे-धीरे भीतर चला जाना |
| छनकर | छानकर, फ़िल्टर होकर |
| कष्ट | परेशानी, दुःख |
| मजबूरी | विवशता |
| रखवाली | सुरक्षा करना |
| जल संकट | पानी की कमी की स्थिति |
| बहुमूल्य | बहुत कीमती |
| जलभराव | किसी स्थान पर पानी का भर जाना |
| जलराशि | पानी की मात्रा |
| उपयोग | काम में लाना |
| लालच | अधिक पाने की इच्छा |
| समतल | बराबर, सपाट |
| उपलब्धता | प्राप्त होने की स्थिति |
मुहावरे और उनका प्रयोग – पानी रे पानी Chapter 4 Class 7
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|
| हक छीनना | किसी का अधिकार छीन लेना | मोटर लगाकर दूसरों का पानी खींचना उनके हक छीनने के समान है। |
| तू-तू, मैं-मैं होना | झगड़ा होना | पानी भरने को लेकर पड़ोसियों में तू-तू, मैं-मैं हो गई। |
| चक्कर में पड़ना | परेशानी में फँस जाना | पानी की बर्बादी करने वाले लोग आगे चलकर जल संकट के चक्कर में पड़ जाते हैं। |
| सजा मिलना | गलत कार्य का परिणाम भुगतना | तालाबों को नष्ट करने की सजा आज पूरा समाज भुगत रहा है। |
| थम जाना | रुक जाना | बाढ़ आने पर कई दिनों तक जनजीवन थम जाता है। |
| डूब जाना | पानी में पूरी तरह भर जाना | लगातार वर्षा से कई गाँव डूब गए। |
| भरते रहना | लगातार जमा करते रहना | हमें वर्षा का जल धरती की गुल्लक में भरते रहना चाहिए। |
| भूल जाना | ध्यान न देना | लोगों ने जल स्रोतों का महत्व भूल दिया। |
| रखवाली करना | सुरक्षा करना | हमें तालाबों और नदियों की रखवाली करनी चाहिए। |
| फँसते चले जाना | लगातार कठिनाई में पड़ते जाना | यदि जल संरक्षण नहीं करेंगे, तो हम पानी की समस्या में फँसते चले जाएँगे। |