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लेखक परिचय
राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ (1897–1927) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान क्रांतिकारी, कवि और लेखक थे। वे उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों में से थे जिन्होंने देश को अंग्रेज़ी शासन से मुक्त कराने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में हुआ था। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की भावना प्रबल थी और वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए।
राम प्रसाद बिस्मिल काकोरी कांड के प्रमुख क्रांतिकारियों में थे। उन्होंने अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध अनेक क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया। उनकी प्रसिद्ध रचना “सरफ़रोशी की तमन्ना” आज भी देशभक्ति की प्रेरणा देती है। वे एक उत्कृष्ट कवि, लेखक और शायर भी थे।
जेल में रहते हुए उन्होंने अपनी आत्मकथा “निज जीवन की एक छटा” लिखी, जिसमें उनके जीवन के संघर्षों, विचारों और देशप्रेम का वर्णन मिलता है। “मेरी माँ” इसी आत्मकथा का एक अंश है। मात्र 30 वर्ष की आयु में अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें फाँसी दे दी लेकिन उनका बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।
मेरी माँ Summary
मेरी माँ पाठ में लेखक ने अपनी माता के व्यक्तित्व, उनके त्याग, प्रेम और अपने जीवन पर उनके प्रभाव का भावपूर्ण वर्णन किया है।
बिस्मिल बताते हैं कि बचपन से ही उनकी रुचि देशसेवा और सामाजिक कार्यों में थी। जब वे लखनऊ कांग्रेस और सेवा-समिति के कार्यों में भाग लेना चाहते थे, तब उनके पिता और दादी इसका विरोध करते थे, लेकिन उनकी माता हमेशा उनका उत्साह बढ़ाती थीं। कई बार उन्हें इसके लिए डाँट और कष्ट भी सहने पड़ते थे।
लेखक अपनी माता को अपने साहस और दृढ़ता का प्रमुख स्रोत मानते हैं। उनकी माता शिक्षा के महत्व को समझती थीं और चाहती थीं कि बिस्मिल पहले शिक्षा प्राप्त करें, उसके बाद विवाह करें। उन्होंने अपने पुत्र को सदैव सत्य और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इसी कारण बिस्मिल ने कभी भी गलत कार्य का समर्थन नहीं किया।
बिस्मिल की माता स्वयं भी प्रेरणादायक व्यक्तित्व की धनी थीं। कम आयु में विवाह होने और अशिक्षित होने के बावजूद उन्होंने स्वयं पढ़ना-लिखना सीखा और अपने बच्चों को शिक्षा दी। उनके विचार समय के साथ और अधिक उदार तथा प्रगतिशील बन गए।
पाठ के अंतिम भाग में बिस्मिल अपनी माता के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि वे जीवन भर उनकी कृपा और उपकारों का ऋण नहीं चुका सकते। वे अपनी माता को विश्वास दिलाते हैं कि उनका बलिदान भारत माता की सेवा के लिए होगा और इससे उनकी कोख गौरवान्वित होगी। इस प्रकार यह पाठ माता के प्रेम, त्याग, संस्कारों और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा को उजागर करता है।
कठिन शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| उत्साह | जोश, उमंग |
| विरोध | असहमति, रोकना |
| प्रोत्साहन | हौसला बढ़ाना |
| सद्व्यवहार | अच्छा व्यवहार |
| दृढ़ता | मजबूती, अटलता |
| संकल्प | निश्चय, प्रण |
| आपत्ति | कठिनाई, बाधा |
| धर्मविरुद्ध | धर्म के विरुद्ध |
| कदापि | कभी भी नहीं |
| आचरण | व्यवहार, चरित्र |
| अशिक्षित | जिसने शिक्षा प्राप्त न की हो |
| अक्षर-बोध | पढ़ने-लिखने का प्रारंभिक ज्ञान |
| परिश्रम | मेहनत |
| अध्ययन | पढ़ना |
| उदार | खुले विचारों वाला |
| क्रांतिकारी | क्रांति करने वाला |
| प्राणहानि | किसी की मृत्यु होना |
| प्राणदंड | मृत्युदंड |
| जन्मदात्री | जन्म देने वाली माँ |
| ऋण | उपकार, एहसान |
| अवर्णनीय | जिसका वर्णन न किया जा सके |
| देववाणी | श्रेष्ठ और प्रेरणादायक वचन |
| देश-सेवा | देश के हित के लिए कार्य |
| मंगलमयी | कल्याणकारी |
| धृष्टतापूर्ण | उद्दंडता या बदतमीजी से भरा |
| आत्मिक | आत्मा से संबंधित |
| उन्नति | प्रगति, विकास |
| अधीर | धैर्य खो देने वाला |
| सांत्वना | ढांढस, दिलासा |
| ऐश्वर्य | वैभव, संपत्ति |
| श्रद्धापूर्वक | आदरपूर्वक |
| कलंकित | बदनाम |
| स्वाधीन | स्वतंत्र |
| बलिदान | त्याग, कुर्बानी |
| विचलित | डगमगा जाना, घबरा जाना |
मेरी माँ Chapter में प्रयुक्त मुहावरे
| मुहावरा | अर्थ | पाठ में प्रयुक्त वाक्य |
|---|---|---|
| होश उड़ जाना | बहुत घबरा जाना या आश्चर्यचकित हो जाना | “इस पुस्तक ने अंग्रेजों के होश उड़ा दिए।” |
| उत्साह भंग होना | हिम्मत या जोश टूट जाना | “माताजी मेरा उत्साह भंग न होने देती थीं।” |
| मस्तक झुक जाना | श्रद्धा या सम्मान से सिर झुक जाना | “तुम्हारी मंगलमयी मूर्ति का ध्यान आ जाता है और मस्तक झुक जाता है।” |
| धैर्य धारण करना | संयम बनाए रखना | “मुझे विश्वास है कि तुम यह समझकर धैर्य धारण करोगी।” |
| कोख कलंकित करना | माता का नाम बदनाम करना | “उसने तुम्हारी कोख कलंकित न की।” |