तीन बुद्धिमान Class 7 की Malhar textbook में दी गयी एक प्रेरणादायक लोककथा है। इस कथा में एक निर्धन व्यक्ति अपने तीन बेटों को धन-संपत्ति के बजाय पैनी दृष्टि, सूक्ष्म अवलोकन और तीव्र बुद्धि को जीवन का सबसे बड़ा धन मानने की शिक्षा देता है। पिता की मृत्यु के बाद तीनों भाई यात्रा पर निकलते हैं और मार्ग में केवल चिन्हों तथा परिस्थितियों का निरीक्षण करके एक खोए हुए ऊँट के बारे में कई सही बातें बता देते हैं। ऊँट का मालिक उन्हें चोर समझकर राजा के सामने ले जाता है। राजा उनकी बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेता है और वे बिना देखे ही पेटी में रखे कच्चे अनार का सही अनुमान लगा देते हैं। अंततः उनकी असाधारण बुद्धि और तर्कशक्ति सिद्ध हो जाती है तथा राजा उन्हें सम्मान देकर अपने दरबार में स्थान देता है। यह पाठ हमें सिखाता है कि ज्ञान, सूक्ष्म निरीक्षण, तार्किक सोच और सत्यनिष्ठा जीवन की सबसे बड़ी पूँजी हैं।
तीन बुद्धिमान Summary
एक निर्धन व्यक्ति के तीन बेटे थे। वह अपने बेटों से कहा करता था कि उसके पास न धन है और न सोना-चाँदी, इसलिए वे ऐसा धन अर्जित करें जो कोई चुरा न सके। वह धन है—हर वस्तु और परिस्थिति को ध्यानपूर्वक समझने और देखने की क्षमता। उसके अनुसार पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि ही जीवन का सबसे बड़ा धन है।
कुछ समय बाद पिता की मृत्यु हो गई। तब तीनों भाइयों ने संसार देखने का निश्चय किया और यात्रा पर निकल पड़े। वे चालीस दिनों तक कठिन मार्गों से होते हुए चलते रहे। उनके पास का सारा भोजन समाप्त हो गया था, वे थक चुके थे और उनके पैरों में छाले पड़ गए थे। अंततः उन्हें एक बड़ा नगर दिखाई दिया।
नगर के निकट पहुँचते समय सबसे बड़े भाई ने रास्ते पर बने निशानों को देखकर अनुमान लगाया कि वहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गुज़रा है। कुछ दूर आगे बढ़ने पर मझले भाई ने देखा कि सड़क के केवल एक ओर की घास चराई गई है, इसलिए उसने अनुमान लगाया कि ऊँट एक आँख से नहीं देख सकता। सबसे छोटे भाई ने ऊँट के बैठने के निशान, स्त्री के जूतों के निशान तथा छोटे पैरों के चिह्न देखकर बताया कि ऊँट पर एक महिला और एक बच्चा सवार थे।
थोड़ी देर बाद उन्हें एक घुड़सवार मिला जो अपना खोया हुआ ऊँट खोज रहा था। भाइयों ने उससे उसके ऊँट के बारे में पूछा और उसके बारे में सही-सही बातें बता दीं। यह सुनकर घुड़सवार को उन पर संदेह हो गया। उसे लगा कि इन लोगों ने ही उसका ऊँट चुराया है तथा उसकी पत्नी और बच्चे को नुकसान पहुँचाया है। वह उन्हें पकड़कर राजा के दरबार में ले गया।
राजा ने भी पहले घुड़सवार की बात मान ली और भाइयों को चोर समझा। लेकिन जब भाइयों ने बताया कि वे केवल निरीक्षण और बुद्धि के आधार पर बातें जानते हैं, तब राजा ने उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया। उसने एक बड़ी पेटी मँगवाई और उनसे पूछा कि उसके अंदर क्या है।
सबसे बड़े भाई ने कहा कि पेटी में कोई छोटी गोल वस्तु है। मझले भाई ने बताया कि वह अनार है और सबसे छोटे भाई ने कहा कि वह अनार कच्चा है। जब पेटी खोली गई तो उसमें सचमुच एक कच्चा अनार निकला। यह देखकर राजा और दरबार के सभी लोग आश्चर्यचकित रह गए।
राजा ने उनसे उनके अनुमान का कारण पूछा। भाइयों ने बताया कि पेटी हल्की थी और उसमें गोल वस्तु के लुढ़कने की आवाज़ आई थी। पेटी बगीचे की दिशा से लाई गई थी जहाँ अनार के पेड़ थे, इसलिए उसमें अनार होने का अनुमान लगाया गया। खिड़की से दिखाई दे रहे पेड़ों पर सभी अनार कच्चे थे, इसलिए उन्होंने बताया कि पेटी में रखा अनार भी कच्चा है। इसी प्रकार उन्होंने ऊँट के बारे में भी अपने निरीक्षण और तर्क के आधार पर सही निष्कर्ष निकाले थे।
राजा उनकी असाधारण बुद्धिमत्ता, सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति और तार्किक सोच से अत्यंत प्रभावित हुआ। उसने उन्हें निर्दोष घोषित कर दिया, ऊँट के मालिक को सही दिशा में जाकर अपना ऊँट खोजने का आदेश दिया तथा तीनों भाइयों को सम्मानपूर्वक अपने दरबार में स्थान दे दिया।
कठिन शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| निर्धन | गरीब, जिसके पास धन न हो |
| संचित | इकट्ठा किया हुआ |
| पैनी दृष्टि | गहरी और सूक्ष्म देखने की क्षमता |
| तीव्र बुद्धि | तेज दिमाग, शीघ्र सोचने की शक्ति |
| श्रमिक | मजदूर |
| सुनसान | जहाँ कोई न हो |
| वीरान | उजाड़, निर्जन |
| घाटियाँ | पहाड़ों के बीच का नीचा भाग |
| छाले | त्वचा पर घर्षण से बने फफोले |
| घुड़सवार | घोड़े पर सवार व्यक्ति |
| संदेह | शक |
| चरवाहा | पशुओं को चराने वाला |
| रेवड़ | पशुओं का झुंड |
| सुरक्षा कर्मी | रक्षा करने वाले कर्मचारी |
| निर्दोष | जिसने कोई अपराध न किया हो |
| परिवेश | आसपास का वातावरण |
| अवश्य | निश्चित रूप से |
| अनुमान | किसी बात का तर्क के आधार पर अंदाजा |
| उद्यान | बगीचा |
| आवभगत | आदर-सत्कार |
| चिन्ह | निशान |
| परीक्षण | जाँच |
| असाधारण | सामान्य से अलग, विशेष |
| तीक्ष्ण | बहुत तेज |
| कोष | भंडार |
| प्रशंसा | सराहना |
| चिकत | आश्चर्यचकित |
| विनती | प्रार्थना |
| रोमांचक | उत्साह पैदा करने वाला |
| मौलिक | मूल, नया |
| प्रासंगिक | विषय के अनुसार उचित |
Teen Buddhimaan Chapter me Use huye मुहावरे
| मुहावरा / प्रयोग | अर्थ | पाठ में प्रयोग |
|---|---|---|
| दृष्टि से न चूकने देना | किसी बात पर पूरा ध्यान देना, कुछ भी नज़रअंदाज़ न करना | “हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते।” |
| चारों ओर नज़र दौड़ाना | ध्यानपूर्वक इधर-उधर देखना | “जब मैंने घुड़सवार को अपने चारों ओर नज़र दौड़ाते देखा…” |
| मुँह तक न देखना | बिल्कुल न देखना | “हमने तुम्हारे ऊँट का मुँह तक नहीं देखा।” |
| शंका की दृष्टि से देखना | संदेह करना | “घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा।” |
| तलवार घुमाना | धमकी देना, भय दिखाना | “उसने अपनी तलवार निकाल ली और उसे जोर से घुमाते हुए…” |
| कोई ठिकाना न होना | बहुत अधिक होना, सीमा न होना | “लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था।” |
| आश्चर्य की सीमा न रहना | अत्यधिक आश्चर्य होना | “उसके आश्चर्य की कोई सीमा न रही।” |
| समझ में आ जाना | बात का ज्ञान हो जाना | “मेरी समझ में यह बात आ गई कि वह क्या खोज रहा है।” |
| आवभगत करना | आदर-सत्कार करना | “उसने सभी तरह के अच्छे भोजन मँगवाए और भाइयों की आवभगत करने लगा।” |
| दरबार में रख लेना | सम्मानपूर्वक पद देना | “उसने उन्हें अपने दरबार में रख लिया।” |