फूल और काँटा Class 7 Chapter 3 Summary Hindi Malhar Phool aur Kanta Explanation

Phool aur Kanta Class 7 Vyakhya Hindi Malhar is very useful in preparation of the exams and learning important concepts. Here you will get Padvar vyakhaya of this chapter.

कवि परिचय

अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म सन् 1865 में उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में हुआ था। वे खड़ी बोली हिंदी के प्रमुख साहित्यकारों में गिने जाते हैं। उनकी प्रसिद्ध काव्य-कृति ‘प्रियप्रवास’ को खड़ी बोली हिंदी का पहला महाकाव्य माना जाता है। उन्होंने बच्चों के लिए भी अनेक रोचक और शिक्षाप्रद कविताएँ लिखीं। सन् 1947 में उनका निधन हो गया।

बाल-काव्य – चंद्र-खिलौना और खेल-तमाशा।

पाठ के बारे में

फूल और काँटा अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध द्वारा रचित एक प्रेरणादायक कविता है। इस कविता में कवि ने फूल और काँटे के माध्यम से मनुष्य के स्वभाव और चरित्र का चित्रण किया है। फूल और काँटा दोनों एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं तथा उन्हें समान चाँदनी, वर्षा और हवा प्राप्त होती है, फिर भी उनके गुण और व्यवहार अलग-अलग होते हैं। काँटा दूसरों को पीड़ा पहुँचाता है जबकि फूल अपनी सुगंध, सुंदरता और मधुरता से सबको प्रसन्न करता है। कवि इस उदाहरण द्वारा यह संदेश देते हैं कि किसी व्यक्ति की महानता उसके परिवार, कुल या जन्म से नहीं बल्कि उसके गुणों, स्वभाव और कर्मों से निर्धारित होती है। हमें अपने जीवन में फूल जैसे गुण अपनाकर दूसरों के लिए सुख, प्रेम और आनंद का कारण बनना चाहिए।

हैं जनम लेते जगह में एक ही,
एक ही पौधा उन्हें है पालता।
रात में उन पर चमकता चाँद भी,
एक ही सी चाँदनी है डालता॥

व्याख्या

कवि कहते हैं कि फूल और काँटा दोनों एक ही स्थान पर जन्म लेते हैं और एक ही पौधा उनका पालन-पोषण करता है। रात के समय उन पर एक ही चाँद अपनी चाँदनी बिखेरता है। अर्थात् दोनों को समान वातावरण और समान सुविधाएँ प्राप्त होती हैं। कवि यहाँ यह बताना चाहते हैं कि किसी व्यक्ति के जन्म या परिस्थितियों से उसके गुणों का निर्धारण नहीं होता।

मेह उन पर है बरसता एक सा,
एक सी उन पर हवाएँ हैं बही।
पर सदा ही यह दिखाता है हमें,
ढंग उनके एक से होते नहीं॥

व्याख्या

कवि कहते हैं कि फूल और काँटे पर समान रूप से वर्षा होती है तथा एक जैसी हवाएँ बहती हैं। फिर भी उनके स्वभाव और व्यवहार एक जैसे नहीं होते। इससे स्पष्ट होता है कि एक जैसी परिस्थितियाँ होने पर भी प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों और स्वभाव के अनुसार अलग पहचान बनाता है।

छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ,
फाड़ देता है किसी का वर बसन।
प्यार-डूबी तितलियों का पर कतर,
भौंर का है बेध देता श्याम तन॥

व्याख्या

इस पद्यांश में कवि काँटे के स्वभाव का वर्णन करते हैं। काँटा लोगों की उँगलियों को चुभा देता है और उनके सुंदर वस्त्रों को फाड़ देता है। वह तितलियों के पंखों को नुकसान पहुँचाता है तथा भौंरे के काले शरीर को भी घायल कर देता है। काँटा अपने संपर्क में आने वालों को केवल पीड़ा और कष्ट देता है।

फूल लेकर तितलियों को गोद में,
भौंर को अपना अनूठा रस पिला।
निज सुगंधों औ निराले रंग से,
है सदा देता कली जी की खिला॥

व्याख्या

कवि फूल के गुणों का वर्णन करते हुए कहते हैं कि फूल तितलियों को अपनी गोद में स्थान देता है और भौंरों को अपना मधुर रस पिलाता है। वह अपनी मनमोहक सुगंध और सुंदर रंगों से आसपास की कलियों को भी प्रसन्न कर देता है। फूल अपने व्यवहार से सभी को सुख और आनंद प्रदान करता है।

है खटकता एक सब की आँख में,
दूसरा है सोहता सुर शीश पर।
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे,
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर॥

व्याख्या

कवि कहते हैं कि काँटा सबकी आँखों में खटकता है, जबकि फूल देवताओं और सम्मानित व्यक्तियों के सिर पर सजाया जाता है। इसके बाद कवि एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति में अच्छे गुण और महानता नहीं है तो उसके परिवार या कुल की प्रतिष्ठा भी उसके किसी काम नहीं आती। व्यक्ति का सम्मान उसके गुणों और कर्मों के कारण होता है न कि केवल उसके जन्म या कुल के कारण।

कठिन शब्दार्थ

शब्दअर्थ
जनमजन्म
पालतापालन-पोषण करता है
चाँदनीचंद्रमा का प्रकाश
मेहवर्षा, बारिश
हवाएँवायु, पवन
ढंगतरीका, व्यवहार
छेदचुभाना
वर बसनसुंदर वस्त्र
प्यार-डूबीप्रेम से भरी हुई
परपंख
कतरकाट देना
भौंरभौंरा
बेधभेद देना, घायल करना
श्याम तनकाला शरीर
अनूठाअद्भुत, निराला
रसफूलों का मधु
सुगंधखुशबू
निरालेअनोखे
कलीखिलने से पहले का फूल
खटकताबुरा लगना
सोहताशोभा देना
सुरदेवता
शीशसिर
कुलपरिवार, वंश
बड़ाईमहिमा, प्रतिष्ठा
बड़प्पनमहानता, श्रेष्ठता
कसरकमी

कला पक्ष

कविता की भाषा सरल, सहज, सरस और साहित्यिक खड़ी बोली हिंदी है।

कविता में मुख्य रूप से शांत रस तथा नीति रस की अभिव्यक्ति हुई है।

यह कविता तुकांत छंद में रची गई है।

रूपक अलंकार – पूरी कविता में फूल को अच्छे गुणों वाले व्यक्ति तथा काँटे को बुरे स्वभाव वाले व्यक्ति का प्रतीक बनाया गया है।

अनुप्रास अलंकार – एक ही वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार बना है। उदाहरण:

  • किस तरह कुल की बड़ाई काम दे (क वर्ण की आवृत्ति)
  • सदा देता कली का जी खिला (क वर्ण की आवृत्ति)

मानवीकरण अलंकार

फूल और काँटे को मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हुए दिखाया गया है। उदाहरण:

  • फूल लेकर तितलियों को गोद में
  • भौंर को अपना अनूठा रस पिला

फूल — प्रेम, दया, परोपकार, अच्छाई और महानता का प्रतीक।
काँटा — कठोरता, बुराई, पीड़ा और स्वार्थ का प्रतीक।

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