माँ, कह एक कहानी पाठ का Summary Ch 1 Class 7 Hindi Malhar Explanation

Revision Notes of Maa Keh Ek Kahani Class 7 is important for examination purpose and will let students understand the chapter.

कवि परिचय

मैथिलीशरण गुप्त हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म 3 अगस्त 1886 को चिरगाँव, झाँसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे हिंदी खड़ी बोली काव्य के प्रमुख स्तंभों में गिने जाते हैं। प्रारंभ में उन्होंने ब्रजभाषा में तथा बाद में हिंदी में लेखन किया। उनकी रचनाओं ने स्वतंत्रता आंदोलन के समय देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी कारण उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि प्राप्त हुई। उनका निधन 12 दिसंबर 1964 को हुआ।

प्रमुख कृतियाँ – साकेत, भारत-भारती तथा यशोधरा।

पाठ में क्या है?

माँ, कह एक कहानी कविता मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध काव्य-कृति यशोधरा से ली गई है। यह कविता माँ यशोधरा और उनके पुत्र राहुल के बीच संवाद के रूप में रची गई है। कविता में राहुल अपनी माँ से कहानी सुनाने का आग्रह करता है। तब यशोधरा उसे उसके पिता सिद्धार्थ द्वारा एक घायल हंस को बचाने की कथा सुनाती हैं। कहानी में एक ओर आखेटक (शिकारी) है, जिसने हंस को घायल किया और दूसरी ओर सिद्धार्थ हैं, जिन्होंने उस असहाय पक्षी की रक्षा की। जब विवाद न्यायालय तक पहुँचता है तब राहुल से निर्णय करने को कहा जाता है। राहुल न्याय, करुणा और दया के पक्ष में निर्णय देता है। इस प्रकार कविता बच्चों को करुणा, न्याय, संवेदनशीलता और सही-गलत की पहचान का संदेश देती है। साथ ही यह माँ और पुत्र के स्नेहपूर्ण संबंध तथा कहानी के माध्यम से नैतिक शिक्षा देने की कला को भी प्रस्तुत करती है।

माँ, कह एक कहानी व्याख्या Class 7 Chapter 1

“माँ, कह एक कहानी।”
“बेटा, समझ लिया क्या तूने
मुझको अपनी नानी?”

राहुल अपनी माँ से कहानी सुनाने का आग्रह करता है। माँ प्यार भरे मजाक में उससे पूछती हैं कि क्या उसने उन्हें अपनी नानी समझ लिया है जो हर समय कहानी सुनाती रहें।

कठिन शब्दार्थ

  • समझ लिया – मान लिया

कला पक्ष

  • संवाद शैली का प्रयोग।
  • वात्सल्य रस की अभिव्यक्ति।
  • प्रश्नवाचक शैली से रोचकता उत्पन्न हुई है।

“कहती है मुझसे यह चेटी,
तू मेरी नानी की बेटी!
कह माँ, कह, लेटी ही लेटी,
राजा था या रानी?”

राहुल कहता है कि घर की दासी (चेटी) भी उसे यही बताती है कि उसकी माँ उसकी नानी की बेटी है। इसलिए वह माँ से कहानी सुनाने की जिद करता है। वह उत्सुकता से जानना चाहता है कि कहानी में राजा था या रानी।

कठिन शब्दार्थ

  • चेटी – दासी, सेविका
  • लेटी ही लेटी – आराम करते हुए

कला पक्ष

  • बालसुलभ जिज्ञासा का सुंदर चित्रण।
  • “राजा था या रानी” की पुनरावृत्ति से लय और संगीतात्मकता बढ़ी है।
  • संवादात्मक शैली।

“तू है हठी मानधन मेरे,
सुन, उपवन में बड़े सवेरे,
तात भ्रमण करते थे तेरे,
जहाँ सुरभि मनमानी।”

माँ राहुल को अपना प्यारा और जिद्दी पुत्र कहती हैं। फिर कहानी शुरू करती हैं कि एक दिन उसके पिता सिद्धार्थ सुबह-सुबह एक सुंदर बगीचे में घूम रहे थे जहाँ फूलों की सुगंध चारों ओर फैली हुई थी।

कठिन शब्दार्थ

  • हठी – जिद्दी
  • मानधन – अनमोल धन
  • उपवन – बगीचा
  • तात – पिता
  • भ्रमण – घूमना
  • सुरभि – सुगंध
  • मनमानी – स्वतंत्र रूप से फैली हुई

कला पक्ष

  • प्रकृति चित्रण
  • अनुप्रास अलंकार – “सुन, उपवन में बड़े सवेरे”
  • वात्सल्य भाव का सुंदर प्रदर्शन

“वर्ण-वर्ण के फूल खिले थे,
झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे,
हलके झोंके हिले-मिले थे,
लहराता था पानी।”

बगीचे में विभिन्न रंगों के फूल खिले थे। फूलों पर ओस की बूंदें चमक रही थीं। मंद हवा चल रही थी जिससे पेड़-पौधे हिल रहे थे और तालाब का पानी लहरें बना रहा था।

कठिन शब्दार्थ

  • वर्ण-वर्ण – अनेक रंगों के
  • हिम-बिंदु – ओस की बूंदें
  • झलमल – चमकना
  • झोंके – हवा के हल्के झटके

कला पक्ष

  • प्रकृति का सजीव चित्रण।
  • अनुप्रास अलंकार – “हलके झोंके हिले-मिले थे”
  • दृश्यात्मकता (चित्रात्मक शैली)।

“गाते थे खग कल-कल स्वर से,
सहसा एक हंस ऊपर से,
गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से,
हुई पक्ष की हानि!”

पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे। तभी अचानक एक हंस आकाश से नीचे गिर पड़ा। वह किसी शिकारी के तीखे तीर से घायल हो गया था। उसके पंख को चोट पहुँची थी।

कठिन शब्दार्थ

  • खग – पक्षी
  • सहसा – अचानक
  • बिद्ध – घायल
  • खर-शर – तीखा तीर
  • हानि – नुकसान

कला पक्ष

  • करुण रस की शुरुआत।
  • “खग कल-कल” में अनुप्रास अलंकार।
  • घटनात्मक शैली।

“चौंक उन्होंने उसे उठाया,
नया जन्म-सा उसने पाया।
इतने में आखेटक आया,
लक्ष्य-सिद्धि का मानी।”

सिद्धार्थ ने घायल हंस को उठाकर उसकी रक्षा की। हंस को ऐसा लगा जैसे उसे नया जीवन मिल गया हो। तभी शिकारी वहाँ आ पहुँचा जो अपने निशाने पर गर्व कर रहा था।

कठिन शब्दार्थ

  • आखेटक – शिकारी
  • लक्ष्य-सिद्धि – निशाना लगने की सफलता
  • मानी – अभिमानी

कला पक्ष

  • करुणा और दया का चित्रण।
  • उपमा अलंकार – “नया जन्म-सा”।

“माँगा उसने आहत पक्षी,
तेरे तात किंतु थे रक्षी।
तब उसने, जो था खगभक्षी,
हठ करने की ठानी।”

शिकारी घायल हंस को वापस माँगने लगा, लेकिन सिद्धार्थ उसकी रक्षा कर रहे थे। शिकारी अपनी बात पर अड़ गया और विवाद शुरू हो गया।

कठिन शब्दार्थ

  • आहत – घायल
  • रक्षी – रक्षक
  • खगभक्षी – पक्षियों का शिकार करने वाला
  • ठानी – निश्चय किया

कला पक्ष

  • विरोधी पात्रों का चित्रण।
  • न्याय और अन्याय का संघर्ष।

“हुआ विवाद सदय-निर्दय में,
उभय आग्रही थे स्वविषय में,
गई बात तब न्यायालय में,
सुनी सभी ने जानी।”

दयालु सिद्धार्थ और निर्दयी शिकारी के बीच विवाद बढ़ गया। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे, इसलिए मामला न्यायालय तक पहुँच गया।

कठिन शब्दार्थ

  • सदय – दयालु
  • निर्दय – क्रूर
  • उभय – दोनों
  • आग्रही – जिद करने वाले
  • न्यायालय – अदालत

कला पक्ष

  • कथा में नाटकीय मोड़।
  • नैतिक संघर्ष का चित्रण।

“राहुल, तू निर्णय कर इसका—
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका,
सुन लूँ तेरी बानी।”

माँ राहुल से कहती हैं कि अब वह स्वयं निर्णय करे कि न्याय किसके पक्ष में होना चाहिए। वह उसे निडर होकर अपना विचार व्यक्त करने के लिए प्रेरित करती हैं।

कठिन शब्दार्थ

  • निर्णय – फैसला
  • निर्भय – बिना डरे
  • बानी – बात

कला पक्ष

  • प्रश्नोत्तर शैली।
  • नैतिक शिक्षा का आरंभ।

“कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!”

राहुल कहता है कि यदि कोई निर्दोष प्राणी को कष्ट पहुँचाए, तो दूसरे व्यक्ति को उसकी रक्षा करनी चाहिए। न्याय हमेशा रक्षक का साथ देता है, न कि अत्याचारी का। सच्चा न्याय दया और करुणा से युक्त होता है।

कठिन शब्दार्थ

  • निरपराध – निर्दोष
  • उबारे – बचाए
  • रक्षक – रक्षा करने वाला
  • भक्षक – नुकसान पहुँचाने वाला
  • दानी – देने वाला

कला पक्ष

  • कविता का केंद्रीय संदेश।
  • नीति एवं आदर्शवाद का चित्रण।
  • करुणा और न्याय का समन्वय।

“न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।”

माँ राहुल के उत्तर से प्रसन्न हो जाती हैं और कहती हैं कि उसने कहानी का वास्तविक अर्थ समझ लिया है। उसने न्याय और दया का महत्व पहचान लिया है।

कठिन शब्दार्थ

  • गुनी – समझी

कला पक्ष

  • शिक्षा-प्रधान समापन।
  • वात्सल्य और संतोष का भाव।

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